रुक जायेगी ज़िन्दगी उस दिन,
संतुष्ट हो गया मैं अपने से
और अपने आप से जिस दिन.
क्षुब्ध हूँ निराश हूँ तो जीवित मेरी प्यास है
भूखों-नंगो के दुखों से आहत हूँ
तो कुछ कर गुजरने की आस है
प्रश्न आते रहेंगे, उत्तर खोजता रहूँगा
सारे उत्तर मिल गए जिस दिन
नए प्रश्न सोचूंगा उस दिन. by
Amit
JNU, New Delhi
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